दिल्ली पुलिस का साइबर सुरक्षा कियोस्क: अब मिनटों में पता चलेगा फोन में छिपा मालवेयर और संदिग्ध ऐप
आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। बैंकिंग से लेकर निजी बातचीत और दस्तावेज़ों तक, लगभग हर महत्वपूर्ण जानकारी हमारे मोबाइल में मौजूद रहती है। ऐसे में साइबर सुरक्षा पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गई है।

इसी चुनौती से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस ने एक नया कदम उठाया है। पुलिस मुख्यालय में स्थापित साइबर सुरक्षा कियोस्क अब मोबाइल, लैपटॉप, पेनड्राइव और अन्य डिजिटल डिवाइस में मौजूद मालवेयर, वायरस और अनधिकृत ऐप्स की पहचान कर सकता है। यह तकनीक गुजरात के गांधीनगर स्थित National Forensic Sciences University (NFSU) द्वारा विकसित की गई है।
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अन्य संवेदनशील जानकारी तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं
ट्रेनिंग के बाद एक विस्तृत डिजिटल रिपोर्ट भी उपलब्ध कराई जाती है। कर्ताओं के निजी डेटा जैसे फोटो, मैसेज या कॉन्टैक्ट्स को कॉपी या स्टोर नहीं करता। इसका काम केवल सुरक्षा जांच करना और संभावित जोखिमों की जानकारी देना है। नागरिकों और पुलिस दोनों के लिए एक उपयोगी सुरक्षा उपकरण साबित हो सकता है। दिल्ली पुलिस साइबर क्राइम यूनिट, एनएफएसयू से संबंधित आधिकारिक जानकारी।