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ईडी द्वारा कॉइनबेस फ़िशिंग स्कैम घोटाले में जब्त की गई 21 करोड़ की संपति

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ईडी द्वारा कॉइनबेस फ़िशिंग स्कैम घोटाले में जब्त की गई 21 करोड़ की संपति

ईडी द्वारा कॉइनबेस फ़िशिंग स्कैम घोटाले में जब्त की गई 21 करोड़ की संपति : चिराग तोमर, उनके परिवार और उनके साथियों राहुल आनंद, आकाश वैश और पीयूष पराशर की 21.71 करोड़ रुपये की संपत्ति ED द्वारा की गई है ज़ब्त।

ईडी द्वारा कॉइनबेस फ़िशिंग स्कैम घोटाले में जब्त की गई 21 करोड़ की संपति
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एक भारतीय नागरिक के संबंध में एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) द्वारा 21.71 करोड़ रुपये की संपत्ति ज़ब्त की गई है। भारतीय नागरिक को US अधिकारियों द्वारा एक क्रिप्टोकरेंसी फ़िशिंग स्कीम के मास्टरमाइंड के तौर पर हिरासत में लिया गया था, जिसमें उसके द्वारा पीड़ितों से USD 20 मिलियन से ज़्यादा की ठगी की गई थी।

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दिसंबर 2023 में, US पुलिस द्वारा चिराग तोमर को तब गिरफ़्तार किया गया जब वो देश में घुसने की कोशिश कर रहा था; वह अभी यूनाइटेड स्टेट्स की पुलिस की हिरासत में है। उस समय उसकी गिरफ़्तारी के बाद ED द्वारा भारत में उसकी क्रिमिनल कमाई का पता लगाने के लिए जांच शुरू की गई थी।

तोमर को यूनाइटेड स्टेट्स में USD 20 मिलियन से ज़्यादा की चोरी करने हेतु क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज, कॉइनबेस की नकल करने वाली नकली या धोखाधड़ी वाली वेबसाइटों का उपोयोग करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था।

ED द्वारा चिराग तोमर, उनके परिवार और उनके साथियों राहुल आनंद, आकाश वैश और पीयूष पराशर के 21.71 करोड़ रुपये की संपति ज़ब्त कर ली गई हैं। ज़ब्त की गई संपत्तियों में दिल्ली में मौजूद नौ रियल एस्टेट होल्डिंग्स भी शामिल हैं।

स्टडी के मुताबिक, भरोसेमंद वेबसाइटों को बदलने हेतु सर्च इंजन ऑप्टिमाइज़ेशन टूल्स का इस्तेमाल किया था जाता था ताकि स्पूफ वेबसाइट सर्च रिज़ल्ट में सबसे ऊपर दिख सके। कॉन्टैक्ट जानकारी को छोड़कर, नकली वेबसाइट बिलकुल असली वेबसाइट जैसी ही लगती थी।

जब यूज़र अपने लॉगिन क्रेडेंशियल उन वेबसाइट पर डालते थे, तो स्पूफ वेबसाइट यूज़र को गलत जानकारी दिखाती थी।

यूज़र नकली वेबसाइट पर दिए जाने वाले नंबर पर कॉल करते थे, जो आखिर में उन्हें तोमर और उनके साथियों द्वारा हैंडल की गई कॉल्स से जोड़ देता था।

जालसाज़ों द्वारा पीड़ित के अकाउंट तक एक्सेस पाने के बाद तुरंत उनके बिटकॉइन एसेट्स को अपने कंट्रोल वाले वॉलेट में ट्रांसफर कर लिया जाता था । चोरी होने के बाद, क्रिप्टोकरेंसी को भारतीय रुपये में एक्सचेंज करने के बाद दूसरे पीयर-टू-पीयर मार्केटप्लेस पर बेचा जाता था।

इसके बाद ये पैसा तोमर, उनके परिवार और उनके साथियों के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाता था और इसे आगे रियल एस्टेट खरीदने-बेचने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

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