SIM-BINDING और CNAP रेगुलेशन लागू होने से साइबर सिक्योरिटी में होने जा रहे है ये बड़ा बदलाव

SIM-BINDING और CNAP रेगुलेशन लागू होने से साइबर सिक्योरिटी में होने जा रहे है ये बड़ा बदलाव

SIM-BINDING और CNAP रेगुलेशन लागू होने से साइबर सिक्योरिटी में होने जा रहे है ये बड़ा बदलाव: सरकार द्वारा टेलीकॉम और डिजिटल सिक्योरिटी रेगुलेशन को लगातार सख्त किया जा रहा है, जिसका सीधा असर इस बात पर पड़ सकता है कि लोग इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल कैसे करते हैं और कॉल कैसे करते हैं।

SIM-BINDING और CNAP रेगुलेशन लागू होने से साइबर सिक्योरिटी में होने जा रहे है ये बड़ा बदलाव
SIM-BINDING और CNAP रेगुलेशन लागू होने से साइबर सिक्योरिटी में होने जा रहे है ये बड़ा बदलाव

भारत लगातार बढ़ते साइबर क्राइम से जूझ रहा है। टेलीकॉम और डिजिटल सिक्योरिटी रेगुलेशन को लगातार सख्त किया जा रहा है, जिसका सीधा असर इस बात पर पड़ सकता है कि लोग इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप्स का उपयोग कैसे करते हैं और कॉल कैसे करते हैं। हर साल करोड़ों रुपये की ठगी होने के कारण कई लोग अपनी ज़िंदगी भर की कमाई को खो देते हैं। सरकार द्वारा CNAP और SIM-BINDING जैसे फीचर्स लाये जा रहे है। दिसंबर तक, उम्मीद है कि सरकार द्वारा धोखाधड़ी और घोटालों को रोकने हेतु 2026 से कई सख्त बदलावों के साथ नये रेगुलेशन लागू किये जायेंगे।

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SIM-BINDING: यह क्या है?

SIM-BINDING के साथ मैसेजिंग ऐप तब तक कार्य नही कर सकता जब तक कि फोन नंबर से जुड़ा फिजिकल SIM कार्ड डिवाइस के अंदर मौजूद और चालू न हो। अगर यूज़र्स द्वारा अपने फोन से SIM कार्ड निकाला या डीएक्टिवेट किया जाता  हैं, तो वो भारतीय नंबर से जुड़े मैसेजिंग अकाउंट को एक्सेस नहीं कर सकते। WhatsApp, Telegram, Signal, Arattai, Snapchat, Sharechat और दूसरे मैसेजिंग ऐप्स से सम्बन्धित यूज़र्स पर इसका असर पड़ेगा। टेलीकम्युनिकेशन डिपार्टमेंट द्वारा नवंबर में प्लेटफॉर्म्स को इसे लागू करने हेतु 90 दिन दिये गए थे। हालांकि, इसे लागू करने के लिये अलग-अलग समय लग सकता है। इस बीच, ऐसी उम्मीद है कि ये सिक्योरिटी नियम 2026 तक लागू हो जाएगा।

SIM-BINDING: यह क्या है?

कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन (CNAP) नेटवर्क-लेवल फीचर्स में से एक होता है। कम्पनीयों द्वारा धीरे-धीरे TRAI द्वारा पेश किए गए इस फीचर को लागू किया जा रहा हैं। ये फीचर यूज़र के फोन को कॉलर का सिर्फ़ नंबर दिखाने के अलावा उसका नाम देखने से जुडी सुविधा भी देता है। सबसे अच्छी बात है कि ये फीचर बिना कोई ऐप इंस्टॉल किये फोन पर काम करेगा। इस फीचर हेतु यूज़र्स को किसी भी ऐप के लिये कोई प्राइवेसी से जुड़ी परमिशन देने की ज़रूरत नहीं होगी। TRAI द्वारा टेलीकॉम प्रोवाइडर्स से पायलट प्रोग्राम के अंतर्गत CNAP का टेस्ट करने से जुड़ा आग्रह किया गया है।

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