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IFSEC India 2025 के अंतर्गत दिखा बढ़ती टेक्नोलॉजी का दबदबा

IFSEC India 2025 के अंतर्गत दिखा बढ़ती टेक्नोलॉजी का दबदबा

IFSEC India 2025 के अंतर्गत दिखा बढ़ती टेक्नोलॉजी का दबदबा

IFSEC India 2025 के अंतर्गत दिखा बढ़ती टेक्नोलॉजी का दबदबा | दिल्ली के भारत मंडपम के अंतर्गत IFSEC India 2025 से जुड़ा 18वां एडिशन शुरू हुआ और इस बार फोकस ‘भारत की सिक्योरिटी और सर्विलांस इंडस्ट्री के हाई-टेक मोड़’ को रखा गया है। AI, IoT, डेटा-ड्रिवन एनालिटिक्स, स्मार्ट कमांड प्लेटफॉर्म्स और अगली पीढ़ी से जुड़े फायर एंड लाइफ सेफ्टी सिस्टम्स इस पूरे Expo से सम्बन्धित दिशा तय करते दिखेंगे। ये इवेंट अब तक का सबसे बड़ा एडिशन माना जा रहा है, जिसके दौरान 150 से अधिक प्रदर्शक, 350 से ज्यादा ब्रांड्स और करीब 20,000 प्रोफेशनल्स के शामिल होने से जुडी तैयारी की जा रही है।

IFSEC India 2025 के अंतर्गत दिखा बढ़ती टेक्नोलॉजी का दबदबा
IFSEC India 2025 के अंतर्गत दिखा बढ़ती टेक्नोलॉजी का दबदबा

इस साल से जुड़ा थीम “Shaping Nations, Securing Futures” रखा गया है और इसके उद्घाटन समारोह के अंतर्गत सरकार के विभिन्न विभागों और सुरक्षा एजेंसियों से सम्बन्धित सीनियर ऑफिशियल्स शामिल हुये। उद्घाटन के दौरान जानकारी दी गई कि भारत अगले कुछ वर्षो के दौरान AI-बेस्ड नेशनल सिक्योरिटी सिस्टम्स की ओर तेजी से बढ़ रहा है। नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर सर्विसेज इन्कॉर्पोरेटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री आलोक तिवारी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2030 तक AI सरकारी डिजिटल स्ट्रक्चर से सम्बन्धित “फाउंडेशन लेयर” बन जाएगा। उनके अनुसार हाल के महीनों में सरकारी नेटवर्क्स पर साइबर हमले बहुत तेज हुये हैं और Operation Sindoor के बाद से ऐसे प्रयास लगभग सात गुना ज्यादा बढ़ चुके हैं। उनकी बात से एक और चिंता सामने आई कि वर्ष 2028 तक क्वांटम कंप्यूटिंग (Quantom Computing) मौजूदा एन्क्रिप्शन सिस्टम्स को अप्रभावी कर सकती है, इसलिए क्वांटम-रेजिलिएंट सिक्योरिटी स्ट्रक्चर की तैयारी करना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है।

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इवेंट के दौरान पुडुचेरी की सेक्रेटरी स्मृति पद्मा जायसवाल (IAS) द्वारा बढ़ते साइबरक्राइम को लेकर चिंता जताई गई। उन्होंने कहा कि साइबर क्राइम आज पूरे विश्व की एक ट्रिलियन-डॉलर इंडस्ट्री बन चुका है, जबकि साइबरसिक्योरिटी क्षेत्र से सम्बन्धित साइज अभी भी उससे बहुत ही ज्यादा छोटा है। डिजिटल पेमेंट्स, क्लाउड सर्विसेज और AI-बेस्ड ऑटोमेशन के बढ़ने के साथ ही खतरे अब जितने जमीन पर हैं, उतने ही क्लाउड पर भी बढ़ चुके हैं।

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