AI अपनाने की दौड़ में भारतीय कंपनियों पर बढ़ा साइबर जोखिम, Zoho रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

AI अपनाने की दौड़ में भारतीय कंपनियों पर बढ़ा साइबर जोखिम, Zoho रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

भारत में कंपनियां तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपना रही हैं, लेकिन साइबर सुरक्षा की बुनियादी तैयारियों में अभी भी कई कमियां मौजूद हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञ AI को समाधान मानने के साथ-साथ मजबूत सुरक्षा ढांचे की जरूरत पर भी जोर दे रहे हैं।

AI अपनाने की दौड़ में भारतीय कंपनियों पर बढ़ा साइबर जोखिम, Zoho रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
AI अपनाने की दौड़ में भारतीय कंपनियों पर बढ़ा साइबर जोखिम, Zoho रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

AI पर भरोसा बढ़ा, लेकिन सुरक्षा की नींव कमजोर

Zoho Corp की State of Workforce Password Security Report 2026 के अनुसार, भारत की 93% कंपनियां मानती हैं कि AI उनकी साइबर सुरक्षा को बेहतर बना सकता है। हालांकि, लगभग हर तीन में से एक संगठन ने अभी तक Zero Trust Framework लागू नहीं किया है, जो आधुनिक साइबर सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।

Zero Trust मॉडल का मूल सिद्धांत सरल है—किसी भी यूजर या डिवाइस पर स्वतः भरोसा न करें और हर एक्सेस अनुरोध को सत्यापित करें। इसके बिना संवेदनशील डेटा और सिस्टम अधिक जोखिम में आ सकते हैं।

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कंपनियां AI में निवेश बढ़ा रही हैं

रिपोर्ट बताती है कि 98% भारतीय संगठन AI-आधारित सुरक्षा टूल्स अपनाने की योजना बना रहे हैं। इनमें से 76% का फोकस रियल-टाइम थ्रेट डिटेक्शन और रिस्पॉन्स पर है। कई कंपनियां यूजर बिहेवियर एनालिटिक्स और ऑटोमेटेड एक्सेस कंट्रोल जैसी तकनीकों पर भी निवेश बढ़ा रही हैं।

लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि केवल AI टूल्स जोड़ने से सुरक्षा मजबूत नहीं होगी। यदि पहचान प्रबंधन, एक्सेस कंट्रोल और मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जैसे बुनियादी उपाय कमजोर रहेंगे, तो AI भी सीमित प्रभाव ही दिखा पाएगा।

इनसाइडर थ्रेट बना सबसे बड़ा खतरा

रिपोर्ट के अनुसार, 47% कंपनियां पहले ही किसी न किसी साइबर हमले का सामना कर चुकी हैं। सबसे बड़ा जोखिम बाहरी हैकर नहीं, बल्कि इनसाइडर थ्रेट से सामने आया। 23% संगठनों ने स्वीकार किया कि उन्हें अपने ही कर्मचारियों या आंतरिक सिस्टम से जुड़े जोखिमों की चिंता है। वहीं, रैनसमवेयर और मानवीय त्रुटियां भी प्रमुख खतरे बने हुए हैं।

निष्कर्ष

AI साइबर सुरक्षा को अधिक स्मार्ट और तेज बना सकता है, लेकिन मजबूत सुरक्षा ढांचे का विकल्प नहीं है। भारतीय कंपनियों को AI अपनाने के साथ-साथ Zero Trust, पहचान प्रबंधन और एक्सेस कंट्रोल जैसी बुनियादी सुरक्षा रणनीतियों को भी प्राथमिकता देनी होगी। तभी AI निवेश वास्तविक सुरक्षा लाभ में बदल सकेगा।

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