भारत में साइबर सुरक्षा पर खर्च करना जरूरी: आईटी सचिव की चेतावनी
भारत में साइबर सुरक्षा पर खर्च करना जरूरी: एक सीनियर सरकारी अधिकारी द्वारा कहा गया कि भारत के पास साइबर सिक्योरिटी के फील्ड में पूर्ण तौर पर देसी टेक्नोलॉजी होनी चाहिए और वो बाहरी सॉल्यूशन पर निर्भर नहीं रह सकता।

इलेक्ट्रॉनिक्स और IT सेक्रेटरी एस कृष्णन द्वारा क्वांटम कंप्यूटर बनाने हेतु ग्लोबल कॉम्पिटिशन को लेकर चिंता जताई गई है। माना जाता है कि क्वांटम कंप्यूटर अभी के समय में इस्तेमाल हो रहे किसी भी एन्क्रिप्शन को क्रैक कर सकते हैं।
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ये बात CERT-In और साइबर सिक्योरिटी फर्म SISA द्वारा क्वांटम साइबर रेडीनेस पर एक व्हाइटपेपर जारी करने के बाद कही गई है।
क्वांटम साइबर रेडीनेस डॉक्यूमेंट के अंतर्गत कहा गया है कि 2030 के बाद जिस भी डेटा को सुरक्षित रखने की आवश्यकता है, उसे तुरंत असुरक्षित माना जाना चाहिए।
16 जनवरी, 2025 को, US द्वारा एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी किया गया था जिसमें सरकारी एजेंसियों को 60–270 दिनों के अंदर क्वांटम क्रिप्टोग्राफी के बाद के बदलाव शुरू करने हेतु कहा गया।
कृष्णन के अनुसार, क्रिप्टोग्राफी और क्वांटम मैकेनिक्स के क्षेत्र में बहुत सारा कार्य काम करने की अभी भी ज़रूरत है।
कृष्णन ने कहा कि क्वांटम कंप्यूटर का इस्तेमाल शुरू होने से पूर्व ही डेटा सुरक्षा हेतु सही क्रिप्टोग्राफिक स्टैंडर्ड की ज़रूरत है।
कृष्णन के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय को IT साइड पर लगभग 1,000 करोड़ रुपये खर्च करने हैं, जिसमें से लगभग 513 करोड़ रुपये पहले ही कई क्वांटम टेक्नोलॉजी पहलों हेतु अलग रखे जा चुके हैं।
पेपर के अनुसार, बिज़नेस को ये समझने की आवश्यकता है कि जिस मिनट क्वांटम-वल्नरेबल एन्क्रिप्शन का इस्तेमाल करके ज़रूरी डेटा भेजा या स्टोर किया गया, उसी समय क्वांटम खतरे की घड़ी शुरू हो चुकी है।
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