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भारत की लगभग आधी कंपनियों के लिए सामने है ये सबसे बड़ा खतरा

भारत की लगभग आधी कंपनियों के लिए सामने है ये सबसे बड़ा खतरा

भारत की लगभग आधी कंपनियों के लिए सामने है ये सबसे बड़ा खतरा

भारत की लगभग आधी कंपनियों के लिए सामने है ये सबसे बड़ा खतरा: FICCI और EY द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार लगभग 51% भारतीय कंपनियों का मानना ​​है कि साइबर सुरक्षा में सेंध उनके बिजनेस सम्बन्धित आज सबसे बड़ा खतरा है।

भारत की लगभग आधी कंपनियों के लिए सामने है ये सबसे बड़ा खतरा
भारत की लगभग आधी कंपनियों के लिए सामने है ये सबसे बड़ा खतरा

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 49% कंपनियों का मानना ​​है कि ग्राहकों की ज़रूरतों और उम्मीदों से जुड़ा बदलाव एक बड़ा जोखिम है, जबकि 48% का मानना ​​है कि युद्ध या अंतरराष्ट्रीय संघर्ष जैसी वैश्विक राजनीतिक घटनाएं एक बहुत बड़ा बड़ा खतरा हैं।

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ये स्टडी अलग-अलग इंडस्ट्री से सम्बन्धित टॉप अधिकारियों की राय पर आधारित है और इसमें उन फैक्टर्स को देखा गया है जो प्राइसिंग, सप्लाई चेन, वर्कफोर्स प्लानिंग और टेक्नोलॉजी खर्च पर अपना प्रभाव डालते हैं।

ये दिखाता है कि कंपनियों हेतु जोखिमों को ठीक से मैनेज करना कितना अहम है।

FICCI की कॉर्पोरेट सिक्योरिटी और डिजास्टर रिस्क कमेटी के प्रमुख राजीव शर्मा ने कहा कि आज की अनिश्चित बिजनेस दुनिया में, जोखिमों को समझना, उन्हें मैनेज करना और उनके हिसाब से ढलना लंबी अवधि की सफलता के लिए ज़रूरी है।

कंपनियां अब जोखिम को एक बार की समस्या के तौर पर नहीं देख रही हैं, बल्कि इसे अपनी ओवरऑल स्ट्रेटेजी और प्लानिंग के अंतर्गत शामिल कर रही हैं।

सर्वे में 61% लोगों ने कहा कि तेज़ टेक्नोलॉजिकल बदलाव और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन उनकी कॉम्पिटिटिवनेस पर अपना प्रभाव डाल रहे हैं।

इतने ही प्रतिशत लोगों का ये भी मानना ​​है कि साइबर हमले और डेटा चोरी के कारण वित्तीय नुकसान और कंपनी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँच सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार 57% कंपनियां डेटा चोरी और आंतरिक धोखाधड़ी को लेकर चिंतित हैं।

47% कंपनियां बढ़ते और ज़्यादा जटिल साइबर खतरों से निपटने हेतु संघर्ष कर रही हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से सम्बन्धित दो नए जोखिम भी हैं।

60% उत्तरदाताओं के अनुसार अगर AI जैसी नई टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल नहीं किया गया, तो ये काम और ऑपरेशन्स को नुकसान पहुंचा सकता है।

54% उत्तरदाताओं के अनुसार AI से जुड़े नैतिक और रेगुलेटरी मुद्दों को ठीक प्रकार से नहीं संभाला जा रहा है।

EY इंडिया से जुड़े रिस्क कंसल्टिंग लीडर सुधाकर राजेंद्रन के अनुसार कंपनियां अब एक ही समय के दौरान कई अलग-अलग जोखिमों का सामना कर रही हैं।

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